मधुमक्खी पालन कैसे करें ?


Time : 3/20/2015

मधुमक्खी पालन कृषि से ही जुड़ा एक व्यवसाय है । जिसमें कम लागत और अधिक मुनाफा है । कृषि से जुड़े लोग या फिर बेरोजगार युवक इस व्यवसाय को आसानी से अपना सकते है । कृषिभूमि आपको यह व्यवसाय करने की राह बताने जा रहा है ।

 

 

मधुमक्खी पालन उद्योग करनेवालों की खादी ग्राम उद्योग कई मात्रा में मदद करता है ।  मधुमक्खी पालन एक लघु व्यवसाय है, जिससे शहद एवं मोम प्राप्त होता है। यह एक ऐसा व्यवसाय है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का पर्याय बनता जा रहा है। गौर करनेवाली बात यह है कि शहद उत्पादन के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है।

 

 

मधुमक्खी के प्रकार

 

इस व्यवसाय के लिए चार तरह की मधुमक्खियां इस्तेमाल होती हैं। ये हैं- एपिस मेलीफेरा, एपिस इंडिका, एपिस डोरसाला और एपिस फ्लोरिया। इस व्यवसाय के लिए एपिस मेलीफेरा मक्खियां ही अधिक शहद उत्पादन करने वाली और स्वभाव की शांत होती हैं। इन्हें डिब्बों में आसानी से पाला जा सकता है। इस प्रजाति की रानी मक्खी में अंडे देने की क्षमता भी अधिक होती है।

 

सामग्री

मधुमक्खी पालन के लिए लकड़ी का बॉक्स, बॉक्सफ्रेम, मुंह पर ढकने के लिए जालीदार कवर, दस्तानें, चाकू, शहद, रिमूविंग मशीन, शहद इकट्ठा करने के लिए ड्रम

 

 

सावधानी  

जहां मधुमक्खियां पाली जाएं, उसके आसपास की जमीन साफ-सुथरी होनी चाहिए। बड़े चींटे, मोमभझी कीड़े, छिपकली, चूहे, गिरगिट तथा भालू मधुमक्खियों के दुश्मन हैं, इनसे बचाव के पूरे इंतजाम होने चाहिए।

 

उपयुक्त वातावरण

 

फूलों की खेती के साथ यह उद्योग अधिक फायदेमंद होता है । जिससे  20 से 80 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाती है। सूरजमुखी, गाजर, मिर्च, सोयाबीन, पॉपीलेनटिल्स ग्रैम, फलदार पेडमें जैसे नींबू, कीनू, आंवला, पपीता, अमरूद, आम, संतरा, मौसमी, अंगूर, यूकेलिप्टस और गुलमोहर जैसे पेडवाले क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन आसानी से किया जा सकता है ।

 

उपयुक्त समय

 

मधुमक्खी पालन के लिए जनवरी से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, लेकिन नवंबर से फरवरी का समय तो इस व्यवसाय के लिए वरदान है।

 

लागत

पचास डिब्बे वाली इकाई पर करीब दो लाख रुपए तक का खर्च आता है ।

 

ऋण-व्यवस्था

इस उद्योग के लिए सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से लोन सुविधा उपलब्ध करवाई है। इस व्यवसाय के लिए 2 से 5 लाख रुपए तक का लोन उपलब्ध है, चूंकि यह उद्योग लघु उद्योग श्रेणी के अंतर्गत आता है। इस उद्योग की जानकारी के लिए उद्यान विभाग से भी संपर्क कर सकते है |

 

प्रशिक्षण

शहद उत्पन्न करने के लिए उचित वातावरण, नए-नए उपकरण एवं प्रबंध की जानकारी, उत्पादन के लिए उच्चकोटि की तकनीक, अधिक शहद देने वाली मधुमक्खियों की प्रजातियां, नस्ल सुधार एवं रोगों से बचने की सम्यक जानकारी तथा वैज्ञानिक विधि से मधुमक्खी पालन में नवनिर्मित तकनीक आदि का ज्ञान दिया जाता है।

 

योग्यता

मधुमक्खी पालन से संबंधित कई तरह के सर्टिफिकेट, डिप्लोमा अथवा डिग्री कोर्स किए जा सकते हैं। डिप्लोमा करने वाले अभ्यर्थी के लिए साइंस स्ट्रीम से स्नातक होना जरूरी है, जबकि हॉबी कोर्स के लिए किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं होती। प्रशिक्षण के लिए एक हफ्ते से लेकर 9 महीने तक का कोर्स उपलब्ध है। कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति, जो इस व्यवसाय में दिलचस्पी रखता हो, वह भी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना व्यवसाय शुरू कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क फीस 500 से लेकर 4000 रुपए तक है।

 

प्रशिक्षण संस्थान

 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूसा रोड, नई दिल्ली

नेशनल बी बोर्ड

बी इंस्टीटय़ूशनल एरिया, अगस्त क्रांति मार्ग, हौज खास, नई दिल्ली

निदेशक, उद्यान विभाग, कृषि पंत भवन, जयपुर, राजस्थान

ल्यूपिन ह्यूपिन वेलफेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन, कृष्णानगर, भरतपुर, राजस्थान

राष्ट्रीय बागबानी बोर्ड, लालकोठी, जयपुर, राजस्थान

मधुमक्खी पालन एंड शोध संस्थान कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा

ज्योति ग्रामोद्योग संस्थान, गंगोह, सहारनपुर,

उत्तर प्रदेश

मधुमक्खी प्रशिक्षण केंद्र, हल्द्वानी, नैनीताल

मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण केंद्र, जनमहादेव रोड, खादी ग्रामोद्योग, देहरादून

केन्द्रीय मधुमक्खी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान,

ग्रामोद्योग आयोग, गणेशखिंड रोड, पुणे (महाराष्ट्र)

 

उपर्युक्त जानकारी की मदद से अब जरूर आप मधुमक्खी पालन उद्योग आरम्भ कर सकते है ।

 

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